२००५ को पीटर ड्रंकर का मृत्यु हुवा था उस दिन को "बिज़नेस वीक" मैगज़ीन ने " The man who Invented management" व्यवस्थापन

प्रस्तावना /Introduction –

व्यवस्थापन का उपयोग इंसान को सही मायने में कैसा करना चाहिए में वैज्ञानिक तरीके से किसी ने वास्तविक जीवन में महत्त्व दुनिया को समझाया वह हे पीटर ड्रकर है। एक व्यक्ति का व्यवस्थापन कैसे करना हे यहाँ से देश की व्यवस्थापन प्रणाली कैसे होने चाहिए इसपर उन्होंने बहुत काम किया। वह एक लेखक थे प्राध्यापक थे तथा एक प्रसिद्ध पब्लिक स्पीकर भी रहे है।

पीटर ड्रकर के व्यवस्थापन थेओरी का प्रभाव सारी दुनिया पर रहा है जिस वक्त का उनका दौर था वह प्रथम विश्व युद्ध और द्वितीय विश्व युद्ध का दुनिया पर परिणाम तथा इससे अर्थव्यवस्था पर हुए बुरे प्रभाव उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से देखे और राजनितिक व्यवस्थापन की कई सारी खामिया उन्होंने देखि। हम उन्हें सिर्फ एक व्यावसायिक व्यवस्थापन के एक्सपर्ट मानते है मगर उन्होंने लोकतंत्र की व्यवस्था कैसे होनी चाहिए इसके बारे में कई सारे विचार अपने लेखन द्वारा , सेमिनार्स द्वारा रखे है।

हम यहाँ उनके व्यक्तिगत जीवन से लेकर उनके दुनिया के लिए क्या उपलब्धी रही हे इसके बारे में देखने की कोशिश करेंगे। किसी भी महान व्यक्ति बनने के पीछे कोई प्रेरणा होती हे जिसे हम जानने की कोशिश करेंगे। हर एक इंसान के लिए , संघटन के लिए , व्यावसायिक कंपनी के लिए और देश के लिए व्यवस्थापन कितना जरुरी होता हे यह उन्होंने समझाया है।

पीटर ड्रकर (१९०९ -२००५) / Peter Drucker (1909 -2005) –

उनका जन्म पुराने ऑस्ट्रिया के विएन्ना शहर में ऑस्ट्रिया में हुवा जो बाद में जर्मनी का हिस्सा हुवा था। एक बुद्धिजीवी परिवार में हुवा, उनकी माताजी पेशे से डॉक्टर थी और पिताजी पेशे से एक वकील थे। कई सारे बुद्धिजीवी लोगो का आना जाना उनके घर पर लगा रहता था, जिसमे जोसफ सचंपीटर भी थे जिनका प्रभाव बचपन में पीटर ड्रकर पे काफी रहा जो एक राजनीतिज्ञ , लेखक ,संगीतकार और वैज्ञानिक रहे हे।

१०२७ में अपनी ग्रेजुएशन की शिक्षा पूर्ण करने के बाद उन्होंने एक निजी कंपनी कॉटन कंपनी में काम किया उसके बाद एक पत्रिका में लेखन का काम किया। यह सब गतिविधिया चल रही थी वह दौर था प्रथम विश्व युद्ध के बाद का जिसमे उन्होंने नौकरी करते समय फ्रैंकफर्ट यूनिवर्सिटी से अंतरराष्ट्रीय कानून में डॉक्टरेट पूरी कर ली थी।

१९३३ में उन्होंने जर्मनी छोड़ा और इंग्लैंड में एक इन्शुरन्स कंपनी में काम करना शुरू किया शुरुवाती दिनों का यह जीने के संघर्ष कई दिनों तक चला और १९४३ में उन्होंने अमरीका में शिफ्ट किया और वहा के स्थाई नागरिक बने, यहाँ उनका सिखाने के पेशा शुरू हुवा और उन्होंने अपनी मैनेजमेंट थेओरी को विकसित किया जो दुनिया भर में आज भी इस्तेमाल होती हे। उन्होंने कई सारी किताबे लिखी जो आज भी दुनिया के सभी यूनिवर्सिटी के लिए एक मैनेजमेंट का खजाना है।

पीटर ड्रंकर के व्यवस्थापन सिद्धांत / Management Principles of Peter Drucker –

२००५ को पीटर ड्रंकर का मृत्यु हुवा था उस दिन को “बिज़नेस वीक” मैगज़ीन ने ” The man who Invented management” कुदरती तौर पर व्यवस्थापन कैसा होना चाहिए इसके प्रिंसिपल्स पीटर ड्रकर द्वारा दुनिया को मिले इसमें हमारी एक गलत फहमी रही हे की उनके यह सिंद्धांत केवल कॉर्पोरेट जगत के लिए हे मगर यह बात गलत हे क्यूंकि यह सिद्धांत व्यक्तिगत स्तर से लेकर किसी नॉन प्रॉफिट संघटन और किसी राजनितिक संघटन के लिए भी लागु होते है।

उनके मैनेजमेंट प्रिंसिपल्स में मुख्य रूप से उन्होंने पांच घटक बताए हे वह मुख्य रूप से आगे दिए है, जिसे हम इस आर्टिकल में विस्तृत रूप से निचे जानने की कोशिश करेंगे ।

  • उद्देश्य को निर्धारित करके व्यवस्थापन करना /Management by Objectives
  • प्रबंधन की प्रकृति / Nature of Management
  • प्रबंधन के कार्य / Function of Management
  • संघीय संरचना / Federal Structure
  • संघटनात्मक संरचना / Organizational Structure

जिस दौर में पीटर ड्रकर अपने मैनेजमेंट के विचार दुनिया के सामने रख रहे थे वह दौर था सामाजिक और राजनितिक बदलाव का जहा विश्वयुद्ध की वजह से कई सारे विकसित देशो की अर्थव्यवस्था चरमरा गई थी और इस व्यवस्था को सुधारने के लिए किसी सिद्धांतो की जरुरत महसूस होने लगी थी तभी पीटर ड्रकर ने मैनेजमेंट के इन सिद्धांतो को दुनिया के सामने रखा जिसमे सभी क्षेत्र में यह सिद्धांत इस्तेमाल किए जा सकते थे।

उद्देश्य को निर्धारित करके मैनेजमेंट करना / Management by Objective –

वैसे तो पीटर ड्रकर की मैनेजमेंट थेओरी कॉर्पोरेट जगत में काफी इस्तेमाल की जाती हे तथा दुनिया के सभी प्रोफेशनल शिक्षा प्रणाली में इसे सिखाया जाता है। मगर पीटर ड्रकर के यह सिद्धांत सभी प्रकार के संघटन में इस्तेमाल किये जाते हे तथा कोलिन जैसे विचारक और लेखक उनके सिद्धांतो को विकसित करके व्यक्तिगत स्तर पर कैसे इस्तेमाल कर सकते हे इसके बारे में बताते हे जिसको वह व्यक्तिगत “बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स ” के माध्यम से खुद का मैनेजमेंट कैसे करना चाहिए यह बताते है।

पीटर ड्रकर की यह थेओरी काफी प्रसिद्द हुई और इसे आज लगबघ दुनिया की सभी जनि मानी कम्पनिया तथा अन्य सस्थाए इस्तेमाल करके सफलता प्राप्त कर चुकी है। किसी भी संस्था अथवा कंपनी में उद्देश्य निर्धारित होना बहुत जरुरी होता हे और वह उद्देश्य ऊपर से लेकर निचे तक मैनेजमेंट में पता होना जरुरी होता है। यह उद्देश्य मैनेजमेंट के ऊपरी स्तर के लोग संस्था के सभी वर्ग को साथ में लेकर संस्था को उद्देश्य निर्धारित करते है।

किसी भी सस्था में कई प्रकारके उद्देश्य निर्धारित किये जाते हे जिसमे कंपनी को किसी मक़ाम पर खड़ा करना हे , कंपनी का सेल्स निर्धारित करना इसे कई सारे लक्ष निर्धारित किये जाते है। ऊपरी स्तर से लेकर निचले स्तर पर सभी लोगो का क्या सहभाग होगा यह पहले से निर्धारित किया जाता हे। सफलता इसी उद्देश्य के निर्धारण पर तय होती हे तथा अगर कोई उद्देश्य का मैनेजमेंट सफल नहीं होता तो उसमे बदलाव कैसे करने हे यह निर्धारित किया जाता है।

प्रबंधन की प्रकृति / Nature of Management –

व्यवस्थापन का उद्देश्य निर्धारित होने के बाद किसी भी संस्था अथवा कंपनी को सफलता पूर्वक किसी उद्देश्य के साथ कैसे चलना हे इस प्रक्रिया में जितने भी कार्य किये जाते हे वह प्रबंधन की प्रकृति समझा जाता है। इसमें नेतृत्व निर्धारित करना उद्देश्य के प्रति योजना बनाना तथा किसका रोल क्या होगा यह निर्धारित करना यह इसमें सम्मिलित होता है।

प्रबंधन की प्रकृति में मुख्य रूप से आठ घटक होते हे जो आगे दिए गए है।

  • सार्वभौमिक प्रक्रिया / Universal Process
  • निरंतर प्रक्रिया / Continuous Process
    अदृश्य प्रक्रिया / Intangible Process
  • सामाजिक प्रक्रिया / Social Process
  • कला और विज्ञानं की प्रक्रिया / Art & Science Process
  • उद्देश्य निर्धारित प्रक्रिया / Goal Oriented Process
  • सामूहिक गतिविधि प्रक्रिया / Group Activities Process
  • रचनात्मक प्रक्रिया / Creative Process

पीटर ड्रंकर का मानना था की प्रबंधन के बहुत सारे नियम प्राकृतिक होते हे जो दुनिया के किसी भी संघटन के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हे, इसके लिए वह वैज्ञानिक नियमो का सहारा लेते हे जिसमे कुछ नियम सभी के लिए सामान होते हे। मैनेजमेंट यह किसी भी योजना को प्रत्यक्ष रूप में प्रयोग करने की प्रक्रिया हे तथा वह निरंतर करने से विकसित होते रहती हे जिसके बदलाव हमें स्वीकारने चाहिए। संस्था के सभी सहयोगी किसी उद्देश्य के प्रति उत्साही और आनंदी रहते यह भी संस्था के सफलता पर परिणाम करते है।

मैनेजमेंट यह एक सामाजिक प्रक्रिया हे यह मानते हुए ड्रंकर कहते हे की किसी भी संघटन अथवा संस्था में कई सारे लोग कार्य करते हे इसलिए इन लोगो में विचारो का टकराव होना संभव हे इसलिए इसका नियोजन कैसे करना हे यह ड्रंकर बताते है। सभी प्रकारके उद्देश्य और संस्था का उद्देश्य इस का समन्वय रखना काफी महत्वपूर्ण होता है, जिससे सभी लोगो के व्यक्तिगत उद्देश्य के साथ साथ संस्था का उद्देश्य पूर्ण किया जाता है ।

प्रबंधन के कार्य / Functions of Management –

पीटर ड्रंकर ने १९४३ के बाद अमरीका में प्रोफेसर के रूप में पढ़ना शुरू किया और उसमे भी मैनेजमेंट यह विषय पर वह सिखाते रहे हे जिस ज्ञान को उन्होंने बाद में काफी विकसित किया और सही मायने में वैज्ञानिक तरीके से मैनेजमेंट को समझा और दुनिया के सामने रखा। किसी भी संस्था अथवा कंपनी को सफल करना हे तो उसके उद्देश्य को कैसे प्रस्थापित करना हे। कंपनी के ग्राहक कौन हे और कंपनी के ग्राहक कौन नहीं हे यह सब अध्ययन तार्किक पद्धती से ड्रंकर ने किया।

मुख्य रूप से प्रबंधन के पांच प्रमुख कार्य पीटर ड्रंकर हमें बताते हे वह है।

  • योजना बनाना / Planning
  • आयोजन / Organizing
  • कर्मचारी ,अधिकारी / Staffing
  • संचालन / Directing
  • नियंत्रण /Controlling

किसी भी संघटन अथवा संस्था का उद्देश्य निर्धारित होने के बाद उसका कार्य कैसे चलता हे इसके लिए पीटर ड्रंकर ने ऊपर दिए गए पांच महत्वपूर्ण कार्य बताए हे जिसमे योजना बनाना यह सबसे पहला महत्वपूर्ण कार्य हे जिसके माध्यम से किसी भी कार्य को सफलता पूर्वक वास्तविक तौर पर पूर्ण करना होता है। संघटनात्मक नियोजन के माध्यम से किसको क्या जिम्मेदारी निर्धारित करनी हे इसके माध्यम से संघटन का आयोजन किया जाता है।

अगर किसको कौनसा कार्य करना हे यह सुस्पष्ट नहीं होगा तो किसी भी कार्य को सफलता पूर्वक करना बहुत कठिन हो जाता हे इसलिए वह निश्चित करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। संघटन का निर्णय प्रक्रिया का भार किसके पास देना हे सलाहकार कौन होगा यह सब निर्धारित करना होता है। संचालन काउ करेगा और वास्तविक तौर पर कार्य किसके पास रहेगा यह सब पहले से निर्धारित किया जाता है।

संघीय संरचना / Federal Structure –

वह राजनितिक शासन प्रशासन के मैनेजमेंट सरंचना के कड़े आलोचक रहे हे उनका मानना हे की संघीय ढांचा यह संघीय होना चाहिए इसका मतलब हे वह फ़ेडरल होना चाहिए जिसमे मैनेजमेंट व्यवस्था के सभी पड़ाव पर स्वतंत्र निर्णय लेने का स्वतंत्र होना चाहिए। अगर संघीय उद्देश्य स्पष्ट और निर्धारित हो तो फ़ेडरल संरचना इस्तेमाल करना काफी उपयुक्त होता है।

राजनितिक मैनेजमेंट में अधिकारियो के प्रमोशन्स यह उसकी सेवा कितनी ज्यादा हुई हे इसपर चलती हे और वह डायनामिक नहीं होती अथवा विकसित नहीं होती वह सालो साल एक जैसी चलाई जाती है। जिससे उसके सफल होने का कोई महत्त्व नहीं रहता और वास्तविक तौर पर यह मैनेजमेंट सफल नहीं हो सकता यह उनका मानना था। मैनेजमेंट में अधिकारियो की नियुक्तियां उनके परफॉरमेंस पर निर्धारित होनी चाहिए यह उनका मानना था।

महत्वपूर्ण उद्देश्य निर्धारित करने का अधिकार सबसे ऊपर होना चाहिए मगर अधिकारियो के निर्णय प्रक्रिया को ऊपर से लेकर निचे तक वितरण करना चाहिए यह उनकी थेओरी थी। जिसे हम फ़ेडरल संरचना कहते हे जिसका इस्तेमाल हमें द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्वतंत्र हुए कई सारे देशो ने उनका यह सिद्धांत अपने संविधान में इस्तेमाल किया , जिसमे भारत के संविधान में यह सिद्धांत इस्तेमाल किया गया है।

संघटनात्मक संरचना / Organizational Structure –

संघटनात्मक सरचना कैसी होनी चाहिए इसके लिए पीटर ड्रंकर काफी महत्त्व देते हे और किसी भी संस्था की अथवा कंपनी की सफलता में यह संरचना काफी महत्वपूर्ण होती है। इससे सभी अधिकारिओ के तथा कर्मचारियों के कार्य निर्धारित होते हे और निर्णय प्रक्रिया की जटिलता को यह आसान कर देती है।

अगर यह संरचना गलत प्रस्थापित होती हे तो कंपनी के इसके परिणाम भुगतने पड़ते हे इसलिए इसको सही तरीके से प्रस्थापित करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। पीटर ड्रंकर का मानना था की संघटन के अधिकारी कितने भी अच्छे हो मगर उस कंपनी का संघटणत्मक संरचना अगर सही नहीं हे तो वह संघटन कभी सफल नहीं होता संघटात्मक संरचना का इतना महत्वपूर्ण मामला होता है ।

संघटन का मुख्य उद्देश्य से लेकर अलग अलग स्तर पर निर्धारित किए गए उद्देश्य और व्यक्तिगत स्तर पर दिए गए उद्देश्य यह स्पष्ट और निर्धारित होने चाहिए जिसमे संघटनात्मक संरचना की सफलता महत्वपूर्ण होती है। निर्णय क्षमता और निर्णय प्रक्रिया किसके पास होगी तथा प्रत्यक्ष कार्य को पूर्ण करने की जिम्मेदारी किसपर होगी यह संघातात्मक संरचना निर्धारित करती है। संघातात्मक संरचना संघटन के हर व्यक्ति से पूर्ण क्षमता से कार्य करने में उसकी सफलता निर्धारित होती है।

पीटर ड्रंकर की उपलब्धिया / Achievements of Peter Drucker –

  • मैनेजमेंट के सिद्धांत में उनका मानना था की जितना कार्य आप कर सकते हे वह करे और बाकि कार्य के लिए बाहर से लोगो को हायर करे जिसे आज हम आउट सोर्सिंग कहते हे यह संकल्पना पहली बार उन्होंने दुनिया के सामने रखी।
  • व्यावसायिक तौर पर मैनेजमेंट का महत्त्व पहली बार उन्होंने दुनिया के सामने रखा और आज के मैनेजमेंट शिक्षा का मुख्य ढांचा उनके सिद्धांतो पर आधारित है।
  • प्रॉफिट को प्राथमिकता में नहीं रखना हे और ग्राहक को प्राथमिकता में रखना हे जिससे कंपनी का मूल्य प्रस्थापित होता हे यह उनका मानना था।
  • संघटन के उद्देश्य को निर्धारित करके उसे कैसे सफल किया जा सकता हे यह उन्होंने दुनिया को बताया।
  • संघटन में सभी व्यक्तियों को प्रेरणा देना यह अधिकारियो की क्षमता का मुख्य अंग माना जाता है।
  • वह राजनितिक व्यवस्था के मैनेजमेंट संरचना के गहरे आलोचक रहे हे जो निरंतर एक ही सरंचना पर निरंतर कार्य करती हे और उसमे कोई बदलाव नहीं करती , उनका मानना था की संघटन में निरंतर बदलाव यह सफलता का मुख्य अंग है।
  • संघटनात्मक सरचना में फ़ेडरल व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण होती है पीटर ड्रंकर द्वारा निर्धारित किया गया है जिसमे अधिकारों का विकेन्द्रीकरण कितना महत्वपूर्ण हे यह वह समझाते है।

पीटर ड्रंकर की महत्वपूर्ण किताबे / Importance Books of Peter Drucker –

  • The Effective Executive (1966)
  • The Changing World of the Executives (1954)
  • Managing Oneself (2008)
  • Innovation & Entrepreneurship (1985)
  • The Essential Druckers (2001)
  • Management for Result (1964)
  • Concept of Corporation (1946)
  • Managing for Future (1992)
  • Classic Drucker (2006)
  • The Age of Discontinuity (1966)

पीटर ड्रंकर की management थेओरी का आलोचनात्मक विश्लेषण

पीटर ड्रकर का प्रबंधन सिद्धांत, जिसे प्रबंधन दृष्टि के रूप में भी जाना जाता है, प्रबंधन के क्षेत्र में व्यापक रूप से चर्चा और बहस का विषय है। जबकि प्रबंधन सिद्धांत में ड्रकर का योगदान महत्वपूर्ण रहा है, उनके विचारों की भी विद्वानों और चिकित्सकों द्वारा समान रूप से आलोचना की गई है।

ड्रकर के प्रबंधन सिद्धांत की एक मुख्य आलोचना यह है कि यह संगठनात्मक सफलता प्राप्त करने में प्रबंधक की भूमिका पर बहुत अधिक जोर देता है। आलोचकों का तर्क है कि ड्रकर का सिद्धांत संगठनात्मक प्रदर्शन को चलाने में टीमवर्क, सहयोग और कर्मचारी सशक्तिकरण के महत्व की उपेक्षा करता है। उनका तर्क है कि प्रबंधक को संगठनात्मक सफलता के एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए और प्रबंधन के लिए अधिक सहयोगी दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

ड्रकर के सिद्धांत की एक और आलोचना यह है कि यह संगठनात्मक प्रदर्शन पर बाह्य कारकों के प्रभाव पर पूरी तरह से विचार नहीं करता है। आलोचकों का तर्क है कि ड्रकर का सिद्धांत आंतरिक प्रबंधन प्रक्रियाओं पर बहुत अधिक जोर देता है और यह पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं करता है कि बाजार की स्थिति, तकनीकी प्रगति और नियामक परिवर्तन जैसे बाहरी कारक संगठनात्मक प्रदर्शन को कैसे प्रभावित कर सकते हैं।

इसके अलावा, तर्कसंगत निर्णय लेने की प्रक्रियाओं पर अत्यधिक निर्भरता के लिए ड्रकर के सिद्धांत की आलोचना की गई है। आलोचकों का तर्क है कि ड्रकर का दृष्टिकोण संगठनात्मक व्यवहार के भावनात्मक और सामाजिक पहलुओं की उपेक्षा करता है, जिसका कर्मचारी प्रेरणा, संतुष्टि और संगठनात्मक प्रदर्शन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।

अंत में, जबकि पीटर ड्रकर के प्रबंधन सिद्धांत ने प्रबंधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, यह अपनी सीमाओं और आलोचनाओं के बिना नहीं है। यह संगठनात्मक सफलता प्राप्त करने में प्रबंधक की भूमिका पर बहुत अधिक जोर देता है, टीम वर्क और सहयोग के महत्व की उपेक्षा करता है, और संगठनात्मक प्रदर्शन पर बाहरी कारकों के प्रभाव पर पूरी तरह से विचार नहीं करता है। हालांकि, समकालीन प्रबंधन अभ्यास में ड्रकर के विचार प्रासंगिक और प्रभावशाली बने हुए हैं, और उनके योगदान ने निस्संदेह आधुनिक प्रबंधन सिद्धांत के विकास को प्रभावित किया है।

निष्कर्ष / Conclusion –

पीटर ड्रंकर ने अपने जीवन में ३९ किताबे लिखी हे जो दुनिया भर के ३६ महत्वपूर्ण भाषा में प्रकाशित की गयी है, उन्होंने सही मायने में मैनेजमेंट को वैज्ञानिक तरीके से दुनिया के सामने रखा। कोलिन द्वारा किये गए संधोधन से उन्होंने पाया की उस उस समय की अमरीका की जो सफल कम्पनिया रही थी वह पीटर ड्रंकर के मैनेजमेंट प्रिंसिपल के कारन सफल हुई थी।

आज जो हम देखते हे की मैनेजमेंट के लिए अलग से पेशेवर शिक्षा प्रणाली बनाई गई हे और कॉर्पोरेट क्षेत्र के लिए यह काफी महत्वपूर्ण विद्यार्थी एम्प्लॉयीज के रूप में कॉर्पोरेट जगत को देती है उसका मुलभुत ढांचा पीटर ड्रंकर के विचारो पर आधारित है। मैनेजमेंट को सही मायने में उन्होंने किसी भी संघटन में कैसे इस्तेमाल करना हे यह हमने देखा है।

पीटर ड्रंकर “पीटर ड्रंकर” कैसे बने इसका अध्ययन हमने करने को कोशिश यहाँ की हे उनके प्रेरणा स्त्रोत क्या रहे हे यह जानने की कोशिश हमने की है। हमने मैनेजमेंट की प्रिंसिपल्स तथा उसके कार्य क्या हे यह जानने की कोशिश यहाँ की है। उनका काफी सारा साहित्य जापान में काफी प्रसिद्द हुवा और कॉर्पोरेट क्षेत्र में काफी इस्तेमाल किया जाता है। उनके मैनेजमेंट के विचार कॉर्पोरेट क्षेत्र में काफी इस्तेमाल किये जाते हे मगर यह सामाजिक तथा राजनितिक संघटन में इस्तेमाल किए जाते है।

विल्फ्रेड परेटो 80-20 प्रिंसिपल सिंद्धांत 

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